ध्यान करते समय नींद से कैसे बचें?

जब भी मैं आंखें बंद करके ध्यान करता हूं, तो मुझे नींद आ जाती है। मैं जाग्रत कैसे रह सकता हूं?

सबसे पहले यह समझते हैं कि नींद क्या है। अगर दिन के किसी भी समय नींद से आपकी जिन्दगी में रुकावट आ रही है, तो आपको अपने स्वास्थ्य की बुनियादी जांच करवानी चाहिए और देखना चाहिए कि आपके शरीर में कोई गड़बड़ तो नहीं है।जब आप बीमार होते हैं, तो आप सामान्य से अधिक सोने लगते हैं, शरीर आराम करना चाहता है।


कच्चा भोजन खाएं



दूसरी चीज है वह भोजन जो आप खाते हैं। कम से कम थोड़ी मात्रा में शाकाहारी भोजन, खास तौर पर कच्चा खाना आपके सामान्य स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब आप भोजन को पकाते हैं तो बड़ी मात्रा में प्राणशक्ति नष्ट हो जाती है। इसके कारण भी शरीर में एक तरह का आलस्य आ जाता है। अगर आप थोड़ी मात्रा में कच्ची और ताजी चीजें खाएं, तो कई दूसरे फायदों के अलावा, एक लाभ तुरंत होगा कि आपकी नींद काफी कम हो जाएगी।

आपकी सजगता मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी ऊर्जा को कितना संभाल कर रखते हैं। अगर आप ध्यान करना चाहते हैं, तो आपकी सजगता सिर्फ मन के स्तर पर नहीं, बल्कि आपकी ऊर्जा के स्तर पर भी होनी चाहिए। इसमें मदद करने के लिए, आम तौर पर योग के रास्ते पर चलने वाले लोगों को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें सिर्फ चौबीस कौर खाना चाहिए और हर कौर को कम से कम चौबीस बार चबाना चाहिए। इससे आपका भोजन अंदर जाने से पहले ही मुंह में पच जाएगा और सुस्ती नहीं लाएगा।


चौबीस कौर खाना और बाल गीले रखना


अगर आप शाम के भोजन के समय ऐसा करें और फिर रात को सोएं तो आप आसानी से सुबह साढ़े तीन बजे जग सकते हैं और ध्यान कर सकते हैं। योग प्रणाली में इस समय को ब्रह्म मुहूर्तम कहा जाता है।

यह जागने का आदर्श समय है क्योंकि उस समय खुद प्रकृति आपकी साधना में अतिरिक्त सहयोग करती है। अगर आप स्ना्न करें और अपने बाल गीले रखें तो आप आसानी से आठ बजे तक अपनी पूरी साधना के दौरान जागे हुए और सजग रह सकते हैं। अगर आप अपने सुबह के भोजन में सिर्फ चौबीस कौर खाएं, तो निश्चित रूप से रात के भोजन तक आपको नींद नहीं आएगी। डेढ़ से दो घंटे के भीतर, आपको भूख लग जाएगी और यही बेहतरीन तरीका है। सिर्फ पेट के खाली होने पर उसमें भोजन डालना जरूरी नहीं है। बस पानी पिएं और आप पूरे दिन सचेत और ऊर्जावान रहेंगे। आपका शरीर आपके द्वारा अच्छे से खाए हुए भोजन को सिर्फ व्यर्थ करने की बजाय उसका इस्तेमाल करना सीखेगा। यह दुनिया के लिए आर्थिक रूप से और पर्यावरणीय रूप से अच्छा है और आपके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है – अगर आप इस तरह खाएं तो हो सकता है कि कभी बीमार न पड़ें।


“भोजन के मामले में, अलग-अलग तरह के भोजन आजमाइए और फिर देखिए कि उसे खाने के बाद आपके शरीर को कैसा महसूस होता है।”

प्रश्नकर्ता: शरीर को स्वस्थ रखने में भोजन की क्या भूमिका है? कुछ लोग कहते हैं कि शाकाहारी भोजन उत्तम है, लेकिन बाकी लोगों का कहना है कि आहार में थोड़े-बहुत मांस के बिना आप स्वस्थ नहीं रह सकते। यह बहुत भ्रम पैदा करने वाला है..

आप किस तरह का भोजन करते हैं, यह इन बातों पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि आपकी भोजन के बारे में सोच क्या है, आपके मूल्य और मान्यताएं क्या हैं। इसका फैसला इस आधार पर होना चाहिए कि आपके शरीर को क्या चाहिए। भोजन का संबंध शरीर से है। भोजन के बारे में फैसला लेने के लिए अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से मत पूछिए क्योंकि ये लोग हर पांच साल में अपनी राय बदलते रहते हैं। इसके बारे में अपने शरीर से पूछिए कि वह किस तरह के भोजन से खुश होगा।


शरीर की चुस्ती और आलस को परखें


अलग-अलग तरह के भोजन आजमाइए और फिर देखिए कि आपका शरीर कैसा महसूस करता है। अगर आपका शरीर चुस्त, फुर्तीला और ऊर्जावान महसूस करता है तो समझ लीजिए कि उस भोजन को लेकर आपका शरीर संतुष्ट है। लेकिन अगर शरीर आलस महसूस करता है और उसे चलाने के लिए आपको कैफीन या निकोटीन लेने की जरूरत पड़ती है तो इसका मतलब है कि शरीर खुश और संतुष्ट नहीं है।

अगर आप अपने शरीर की सुनें तो वह आपको साफ-साफ बता देगा कि उसे किस तरह का भोजन पसंद है, लेकिन अभी आप अपने दिमाग की सुन रहे हैं। आपका दिमाग हर वक्त आपसे झूठ बोलता रहता है। याद कीजिए, क्या पहले कभी इसने झूठ नहीं बोला? आज यह आपको बताता है कि यह सही है। इसी बात पर कल आपको यह ऐसा महसूस करा देगा कि आप निरे मूर्ख हैं। इसलिए अपने मस्तिषक के हिसाब से न चलिए। आपको बस अपने शरीर की सुननी है।

हर जानवर, हर प्राणी इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि उसे क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। इंसान की प्रजाति को इस धरती पर सबसे ज्यादा बुद्धिमान माना गया है, लेकिन उसे यह भी नहीं पता कि क्या खाना चाहिए। इंसान को कैसा होना चाहिए, इसकी बात तो छोड़ ही दीजिए, उसे तो यह तक नहीं पता होता कि उसे क्या खाना चाहिए। इसलिए अपने शरीर की बात सुनने की कला सीखने के लिए एक खास किस्म की जागरुकता और ध्यान की जरूरत होती है। एक बार यह सीख गये तो आपको पता चल जाता है कि आपको क्या खाना है और क्या नहीं।

आपके शरीर के भीतर जिस प्रकार का भोजन जा रहा है, उस मामले में निश्चित रूप से शाकाहारी भोजन आपके शरीर के लिए मांसाहारी भोजन से बेहतर है। इस बात को हम नैतिक दृष्टिकोण से नहीं कह रहे हैं। हम तो सिर्फ ये देख रहे हैं कि कौन से खाना शरीर के अनुकूल पड़ता है। हम वही भोजन लेने की कोशिश करते हैं, जो हमारे शरीर को आराम पहुंचाए। चाहे आपको अपना कारोबार सही तरीके से चलाना हो, चाहे पढ़ाई करनी हो या कोई और काम करना हो, यह बड़ा महत्वपूर्ण है किस आपका शरीर आराम की स्थिति में हो और जो खाना आप खा रहे हैं, उससे पोषण लेने के लिए शरीर को संघर्ष न करना पड़े। हमें ऐसा ही भोजन करना चाहिए।


कच्चा भोजन प्राण शक्ति से भरपूर होता है


कभी प्रयोग करके देखिए कि जब आप ताजा और कच्चा शाकाहारी भोजन करते हैं, तो आपका शरीर कितना फर्क महसूस करता है। दरअसल, विचार यह है कि जितना हो सके, उतना ताजा और कच्चा भोजन किया जाये।

एक जीवंत कोशिश में वह सब कुछ होता है जो जीवन को पोषण देने के लिए जरूरी है। अगर आप किसी जीवंत कोशिश का सेवन करते हैं तो आपको जो तन्दुरुस्ती महसूस होगी, वह पहले से बिल्कुल अलग किस्म की गी। जब हम भोजन पकाते हैं, तो इससे इसके भीतर का जीवन नष्ट हो जाता है। जब भोजन की जीवंतता नष्ट हो जाती है, तो वह उतनी मात्रा में जीवन ऊर्जा नहीं देता, लेकिन जब आप कच्चा और ताजा भोजन खाते हैं, तो आपके शरीर में एक अलग स्तर की जीवंतता आती है।

अगर कोई भरपूर मात्रा में अंकुरित अनाज, फल, कच्ची सब्जियां खाए, अगर कोई भोजन का 30 से 40 फीसदी अंश कच्चा ही ले तो आप देखेंगे कि उसके भीतर की जीवंतता भी जबर्दस्त तरीके से बनी रहेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जो भोजन आप ले रहे हैं, वह जीवन है। हम जो खा रहे हैं, वे जीवन के अलग-अलग रूप हैं। जीवन के ये अलग-अलग रूप हमारे जीवन को संभालने के लिए अपने जीवन का त्याग कर रहे हैं। हम जो भी जीवंत और कच्चा भोजन कर रहे हैं, अगर उसे पूरी कुतज्ञता के साथ ग्रहण करें तो यह भोजन हमारे भीतर एक अलग तरीके से काम करेगा।

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If You See Your Child Sitting in THIS Position, Stop it Right Away! The Child is in Danger!

If You See Your Child Sitting in THIS Position, Stop it Right Away! The Child is in Danger!

Your sitting position is very important for your health and body posture. A lot of people, especially children sit in a W position, exactly like on the picture. Children spend much time in this position, because it’s very comfortable for them while they are playing. This way of sitting can be the cause of many problems like inner hip rotation and predisposition for development of serious orthopedic issues. Your muscles may be deformed and this position can lead to muscle contractions. Your bones can also be improper developed.

In this position, the torso muscles cannot maintain body balance normally as a result of the effect of gravitation that exceeds the basic body gravity center. If you want to avoid complications just try not to make this sitting position your habit. if your children are sitting this way then you should warn them about the possible consequences. If you see them sitting this way try to motivate them to sit with their legs straightened up.

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क्या तीर्थ स्थल पर साधना करने से लाभ अधिक होता है ?

यह एक बड़ी पुरानी समस्या है कि लोगों को लगता है कि वे जहां हैं, वह जगह उतनी अच्छी नहीं है, कोई दूसरी जगह उन्हें बेहतर लगती है।


मैं यह नहीं कह रहा कि कुछ खास तरह के कामों के लिए कुछ जगहें सहायक नहीं होती हैं – बिल्कुल ऐसी जगहें हैं – लेकिन आध्यात्मिक प्रक्रिया अंदरूनी यात्रा है। चाहे आप न्यू यॉर्क में हों या हिमालय में, दोनों जगह आप तो वैसे ही रहेंगे। जब आप पहाड़ों पर जाते हैं, तो पहले तीन दिन तो आपको लगता है कि आप भी थोड़े असाधारण हो गए हैं, लेकिन तीन दिन बाद ही ये भाव खत्म हो जाते हैं। फिर वही समस्याएं आएंगी। कभी आप अचानक पहाड़ों के पास जाकर बैठते हैं और सोचते हैं, यहां कितनी शांति महसूस हो रही है। लेकिन आप जाकर पहाड़ों पर रहना शुरू कर दीजिए, फिर देखिए। शहरों में रहने के मुकाबले आपको वहां ज्यादा समस्याओं का सामना करना होगा।


यात्रा को आध्यात्मिक प्रक्रिया से मत जोड़िए


हमने शहरों का निर्माण इसलिए किया, ताकि हर चीज व्यवस्थित हो, हर चीज आसानी से उपलब्ध हो। शहरों का निर्माण हमने समस्या पैदा करने के लिए नहीं किया, जीवन को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए हमने शहर बनाए।

अगर हम सभी अपनी ऊर्जा को एक ही जगह लगा दें, तो किसी पहाड़ की गुफा के मुकाबले कहीं ज्यादा आराम और सुविधा हमारे पास होगी। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि ऐसी जगहें नहीं हैं, जो आपको प्रेरित कर सकती हैं। बिल्कुल हैं ऐसी जगहें, लेकिन अगर आप पहले से प्रेरित हैं, तो जो भी जगह आपके लिए सबसे ज्यादा सुविधाजनक हो, आपको वहीं साधना करनी चाहिए क्योंकि इसका मकसद अंदर की ओर मुडऩा है, किसी यात्रा पर जाना नहीं। आप दुनिया की यात्रा करना चाहते हैं, आपको घूमने का शौक है, आप दुनिया देखना चाहते हैं? जरूर देखिए, लेकिन उसे अलग से कीजिए, उसे आध्यात्मिक प्रक्रिया के साथ मत जोड़िए। आप किसी नई जगह आंखें बंदकर के मत बैठिए। यह अपराध है। आप ताजमहल जाएं और वहां आंखें बंद करके ध्यान करने की कोशिश करने लगें तो यह अपराध होगा। बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं। वे ताजमहल के सामने बैठकर ध्यान करते हैं। नहीं, आपको आंखें खोलकर ताजमहल की कलात्मकता और बनावट का आनंद लेना चाहिए। लोग आर्ट म्यूजियम जाकर भी ऐसा ही करते हैं। ऐसा मत कीजिए।


सिर्फ जीवंत रहना बहुत विशाल घटना है


आप अपनी आंखें बंद करते हैं, क्योंकि आप इस दुनिया से कोई मतलब नहीं रखना चाहते। आंखें बंद करने के पीछे यही वजह तो है।


जब मैं आंखें बंद कर लेता हूं, तो इसका मतलब है कि दुनिया से मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य से ज्यादातर लोग जब आंखें बंद कर लेते हैं, तो दुनिया और बड़े स्तर पर आकर उनके साथ जुड़ जाती है। जब आप इस बात में साफ फर्क कर सकें कि भीतर क्या है और बाहर क्या – तो एक आनंद की अनुभूति होती है, जिसे आपको जरुर महसूस करना चाहिए। अगर मैं अपनी आंखें बंद कर लूं तो दुनिया मेरे लिए पूरी तरह खत्म हो जाती है। अगर मैं कुछ दिनों के लिए खुद को दुनियावी बातों से हटा लूं, पांच, छह दिन अगर मैं सिर्फ अपने साथ रहूं तो मेरे दिमाग में एक भी विचार नहीं आएगा। मैं पढ़ता नहीं हूं, टीवी भी नहीं देखता। मैं कुछ नहीं करता, क्योंकि सिर्फ जीवंत रहना उन सारी फ़ालतू चीजों से कहीं बड़ी घटना है जो हम और आप कर सकते हैं।

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बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए ?

योग जीवन से दूर ले जाने वाली चीज नहीं है। यह आपको जीवन के प्रति आकर्षित करता है। तो मुझे बताइए, शुरुआत करने का समय क्या है? साठ साल की उम्र या जितनी जल्दी संभव हो ?


सात साल की उम्र आम तौर एक अच्छी उम्र मानी जाती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे के सामने कई चीजें रखी जाएं जिनके बारे में वे समझदारी से चुनाव कर सके।अगर आप उनके सामने ये विकल्प नहीं रखेंगे, तो उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि दुनिया में बस वही चीजें है, जो उन्हें दिखती हैं। उन्हें लगेगा कि चुनाव सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक और पिज्जा के बीच करना है, और कुछ भी नहीं है यहां।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जीवन की शुरुआत से ही बच्चे के सामने सही चीजें आएं, जो अंदर से काम करने वाली हों, क्योंकि हम अपने आस-पास की दुनिया में जो व्यवस्था करते हैं, उन्हें एक खास सीमा तक ही संभाला जा सकता है। जब तक आपकी खुशहाली बाहरी हालातों के अधीन और उसकी गुलाम होगी, तब तक आप संयोग से ही खुशहाल होंगे क्योंकि बाहरी हालातों पर किसी का भी सौ फीसदी काबू नहीं होता। जिस तरह आबादी बढ़ रही है, हम नहीं जानते कि अगली पीढ़ी किस तरह की बाहरी व्यवस्थाएं कर पाएगी।

बच्चों को किस तरह का योग सीखना चाहिए?

योग के कुछ सरल प्रकार हैं, जिन्हें बच्चे छह-सात साल की उम्र के बाद कर सकते हैं। मगर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कुछ खास अभ्यास उन्हें नहीं सिखाए जाएं। मैं देखता हूं कि कुछ जगहों पर बच्चों को पद्मासन सिखाया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस समय हड्डियां बढ़ रही होती हैं और मुलायम होती हैं, उस समय अस्थिपंजर पर जोर डालने वाली मुद्राओं में बैठने से उनकी हड्डियां मुड़ सकती हैं।

योग सिखाने वाले को पता होना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या उपयुक्त है। योग हर शख्स की जरूरतों और स्थितियों के अनुसार सिखाया जाता है। वयस्कों को सिखाई जाने वाली हर चीज बच्चों को नहीं सिखाई जानी चाहिए। वयस्कों में भी गृहस्थों को हम एक तरह का योग सिखाते हैं और एक संन्यासी बिल्कुल अलग तरह का योग सीखता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप हर किसी को एक जैसी चीजें न सिखाएं।


हम छोटी उम्र से ही योग के लिए आकर्षण कैसे पैदा कर सकते हैं?

बच्चे के लिए शुरुआत करने का सबसे सरल और सुंदर तरीका नाद योग है।जिसमें ध्वनियों पर अधिकार करना सिखाया जाता है।यह उनकी खुशहाली और शरीर व मन के पूरे विकास में मदद करेगा। योग नमस्कार जैसी क्रियाएं भी हैं, जिन्हें छह-सात साल की उम्र में भी सीखा जा सकता है। उप-योग तकनीकें बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए बराबर लाभदायक हैं। जब उन्हें इन क्रियाओं के फायदे पता चलेंगे, जब उन्हें लगेगा कि इससे वे काबिलियत में अपने साथियों से आगे निकल सकते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से योग के अगले चरणों को सिखना चाहेंगे। बड़े होने के साथ, उनका योग भी विकसित होना चाहिए।

पद्मासन खतरनाक हो सकता है, हर किसी के लिए नहीं है पदमासन.

सभी योगासनों में पदमासन शायद सबसे जाना-माना योगासन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पदमासन खतरनाक हो सकता है आपके लिए? कैलेण्डर में दिखाए जाने वाले योगियों को देख कर कहीं आप भी पदमासन में तो नहीं बैठने लगे? तो यह लेख आपके लिए है… 

आप पद्मासन के बारे में जानते हैं? यह एक ऐसा आसन है जो कैलेंडर में खूब दिखाई देता है,किसी कैलेण्डर या पोस्टर में हमेशा पद्मासन में बैठे व्यक्ति की ही तस्वीर छपी देखने को मिलती है। पद्म का अर्थ होता है कमल, यानी कमल की मुद्रा में बैठना। योग में इस आसन के कई पहलू हैं। अगर आप पद्मासन की खूब गहराई में जाएं तो आप पायेंगे कि अस्तित्व में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसको यह भीतरी या बाहरी रूप से प्रभावित करने की क्षमता न रखता हो। इसका संबंध केवल आंतरिक पहलुओं से नहीं है, बल्कि बाहरी चीजों पर भी यह असरदार है। 

हम इससे मात्र अपने भीतरी दुनिया की इंजीनियरिंग नहीं कर सकते, बल्कि हम इससे इस बाहरी दुनिया की भी इंजीनियरिंग कर सकते हैं।एक इंजीनियरिंग कालेज बनाकर उसके माध्यम से लोगों को किसी भी प्रकार की इंजीनियरिंग की शिक्षा देना आसान है। लेकिन आज जिस तरीके से हमारे विद्यार्थी इंजीनियरिंग सीख रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है कि उनकी यह शिक्षा कई मायनों में बहुत सीमित है। आज का विद्यार्थी चाहता है कि साढ़े चार साल के लिए किसी कॉलेज जाए, वहां से वो डिग्री हासिल करे, फिर अमेरिका जाए, वहां दो साल की डीग्री प्राप्त करे, और बस बात खत्म। बन गया वो इंजीनियर। उसके बाद उसकी दिलचस्पी इस बात में नहीं रह जाती कि वो पूरा जीवन सीखने में व्यतीत करे। जरा सी भी नहीं। 

 वो बस एक खास समय के लिए सीखना या पढ़ना चाहता है। उसके बाद वह चाहता है कि जो कुछ उसने सीखा है उसके बदले में उसे कुछ मिले। वह सोचता है कि शिक्षा का ऐसा उपयोग किया जाए जिससे धन प्राप्ति हो। अगर आप आजीवन सीखने की इच्छा रखते हैं तो आपके लिए यह बात मायने नहीं रखती कि सीखने के बदले आपको कुछ मिलेगा या नहीं। आप बस जीवन भर सीखते रहने का आनंद लेंगे। योग प्रणाली यही सिखाती है। इसी योग प्रणाली के माध्यम से हम इस दुनिया को नये ढंग से गढ़ सकते हैं।

हर किसी के लिए नहीं है पदमासन

दर असल लोग कई तरह के होते हैं किन्तु मूल रूप से उनको दो वर्गों में रखा जा सकता है – संन्यासी और गृहस्थ। गृहस्थों के लिए हमारे पास एक प्रकार के योग अभ्यास हैं जबकि योगी व संन्यासियों के लिए दूसरे तरह के अभ्यास हैं। योग अभ्यासों का पूरी तरह से एक अलग पहलू है जो योगी व संन्यासियों के लिए तय किया गया है। इसलिए अगर एक योगी गृहस्थों के लिए तय की गई योग क्रियाओं को करेगा तो वह एक अच्छा योगी नहीं बन पाएगा। इसी प्रकार एक गृहस्थ योगियों के लिए तय की गई क्रियाओं को करेगा तो वह एक अच्छा गृहस्थ नहीं बन पाएगा।

पदमासन का सही उपयोग

जो लोग पद्मासन करते हैं उसके पीछे कारण यह है कि यह आसन आपकी ऊर्जा को एक निश्चित तरीके से बांध देता है जिससे ऊर्जा नीचे की ओर नहीं जाती और सामान्यतः नाभि से ऊपर ही रहती है। पद्मासन के माध्यम से आप जो हासिल करने का इरादा रखते हैं वह यह है कि शरीर का रख- रखाव या संरक्षण एक निश्चित स्तर तक होता रहे। किन्तु इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पद्मासन के माध्यम से आप ऊर्जा को अपनी शारीरिक तंत्र से बलपूर्वक बाहर कर रहे होते हैं। आप ऐसी स्थिति चाहते हैं जिसमें आपकी आधी ऊर्जा शरीर से बाहर रहे, न कि शरीर के अंदर। आप चाहते है कि आपकी जीवन ऊर्जा का कम से कम तीस से चालीस प्रतिशत हिस्सा आपके आस-पास रहे, न कि आपके अंदर। क्यों? ताकि आप महसूस कर सकें कि आपके अंदर भौतिकता बहुत बड़े पैमाने पर कम हो गई है। लेकिन अगर आपकी शादी हो जाती है और आप पद्मासन करना चाहते हैं, फिर ये बात निश्चित है कि ये आपके लिए काम नहीं करेगा। अगर दांपत्य जीवन भी जी रहे हैं और आप पद्मासन भी करते हैं, तो आप न यहां के रह जाएंगे न वहां के। बात केवल इतनी ही है। अगर आप यहां भी नहीं है और वहां भी नहीं है तो आप एक तरह से नपुंसक बन जाएंगे जो कि अच्छा नहीं होगा। अगर आप वहां हैं, अच्छी बात है। अगर आप यहां हैं तो यहीं रहिये। इन दोनों में से एक चीज ही आपको करनी चाहिए। न इधर के, न उधर के, ऐसी स्थिति अच्छी नहीं कही जाएगी।

तो मूलरूप से पद्मासन ऊर्जा को इस प्रकार बांध देने के लिए है जिससे नीचे की ओर कोई गतिविधि न हो। अगर आप पद्मासन कर रहे हैं और आप पारिवारिक जीवन भी जीवन बीता रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने ऊर्जा तंत्र में सघर्ष, विरोध और प्रतिकूलता पैदा कर रहे हैं जो कि एक गैरजरूरी टकराव है। किसी भी टकराव का मतलब है जीवन में तनाव उत्पन्न करना। किसी भी प्रकार के तनाव का मतलब है कि अक्षमता को आमंत्रित करना। ऐसी अक्षमता जो जीवन को बुरी तरह प्रभावित करेगी। जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित कार्यों को करने में अक्षम बना देगी। आप आध्यात्मिक रूप से भी अक्षम हो जाएंगे। इसके अलावा आप मानसिक और भावनात्मक रूप से अक्षम बन सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आप शारीरिक रूप से किसी काम के न रहें। अगर यही आपका चयन है तो ठीक है। लेकिन आप एक चीज को चुनते हैं और दूसरी चीज को करते हैं, यह कोई समझदारी नहीं है।