5 Types Of Belly Fat And How To Lose Them: What’s Yours?

5 Types Of Belly Fat
• Bloated belly caused by indigestion
• Subcutaneous fat under the skin
• Low belly fat
• Punctured tire belly fat
• Visceral abdominal fat

When you’re at an ideal weight, the hormones and chemicals secreted by fat cells are actually healthy. The problem arises when you have more and larger fat cells than normal, which often occurs in an individual who is overweight. Both traditional medicine and modern medicine agree on the fact that excess belly fat is the primary root cause of many serious health problems including hypertension, diabetes, and chronic inflammation.
1. Bloated And Distended Belly
While bloating (feeling full) and distension (temporary increase in abdominal girth) are not related to belly fat, they are indications of digestive disorders which may eventually lead to belly fat
They are usually caused by excess gas production and/or disturbances in the movement of the muscles of the digestive system.1 Bloating and distension often become most intense after meals, especially if the gap between meals is high, less intense when lying down and improve overnight.
In this case, you do not need excessive exercise. Just follow a balanced diet with foods and herbs that assist and regulate digestion and eliminate specific foods like dairy or gluten that might be causing or aggravating the problem.
2. Subcutaneous Fat
We tend to be most bothered about subcutaneous fat – fat that accumulates below the skin all over the body but more generously around our waist, thighs, and hips. This fat is visible to the eye, plays havoc with our body shape, and is an eye sore – which all of us want to get rid of as quickly as possible.
However, subcutaneous fat is relatively harmless, from a health risks perspective. The urge to get rid of it has more to do with social and cultural mores – in any case, not all cultures look down upon those who look fat, and these perceptions tend to change over time too.
• Exercise For Subcutaneous Fat
• Walk
• Running
• Climbing stairs
• Playing some sports
• Dancing
• Sleeping well
• Free from infections and diseases

3. Low Belly Fat
The soft stomach in the lower abdomen is usually associated with a sedentary life style and minor digestive issues.

If you are otherwise lean but are seeing a gradual increase in girth (the pants are getting tighter), low belly fat is probably what you have. While not a grave cause for concern, it’s best to nip it in the bud with the following:-
• Eating fibrous veggies and fruits
• try to avoid overly processed food like refined flour, sugar, and sugary drinks.
4. Punctured Tire Belly Fat
The pronounced fat bulge around the waist occurs mainly due to a prolonged sedentary life style and unbalanced diet leading to obesity. You know you have a punctured tire belly if the bulge dips around the belly button, like a sagging tire.
• Say a staunch NO to processed and fried foods, sugar, alcohol, and sodas and keep a tab on food portions.
• Include regular moderate-intensity exercise in your daily schedule. Also switch to a weight-control diet consisting of: Whole grains like whole wheat, oats, and brown rice.
• Beneficial fats (poly-unsaturated fats and medium chain saturated fats) like vegetable oil and some nuts
• Essential minerals and vitamins
Progress can be slow and sometimes unsteady – there might be periods where there is no visible impact on weight or girth and then some periods where there are sudden changes – stick to your plan nevertheless.
5. Visceral Abdominal Fat
While subcutaneous fat is an eyesore, it’s the invisible kind of fat that’s much more dangerous. Visceral abdominal fat (VAF) occupies the spaces between the abdominal organs.
VAF has been linked to impairment of glucose and lipid metabolism leading to glucose intolerance, elevation of lipid levels, hypertension, insulin resistance, cardiovascular disease, and type 2 diabetes.
Visceral fat around the abdominal organs is the most dangerous type of fat. If your shirts are getting tighter (around the upper abdomen area) or if it is more of an ordeal to climb stairs (or jog around the park), you must seriously consider the possibility of accumulation of VAF and must start working on it with the following tips:-
• Stop skipping meals
• Quit junk food
• Eat a balanced nutritious diet
• Have smaller portions
• Avoid emotional eating
• Limit caffeine and alcohol intake
• Avoid smoking
• Include moderate-intensity exercise
• And most importantly, practice deep breathing and meditationProgress is usually slow and steady and the results can manifest in multiple ways beyond weight and girth reduction such as easier digestion, better stamina, and better sleep.

ध्यान करते समय नींद से कैसे बचें?

जब भी मैं आंखें बंद करके ध्यान करता हूं, तो मुझे नींद आ जाती है। मैं जाग्रत कैसे रह सकता हूं?

सबसे पहले यह समझते हैं कि नींद क्या है। अगर दिन के किसी भी समय नींद से आपकी जिन्दगी में रुकावट आ रही है, तो आपको अपने स्वास्थ्य की बुनियादी जांच करवानी चाहिए और देखना चाहिए कि आपके शरीर में कोई गड़बड़ तो नहीं है।जब आप बीमार होते हैं, तो आप सामान्य से अधिक सोने लगते हैं, शरीर आराम करना चाहता है।


कच्चा भोजन खाएं



दूसरी चीज है वह भोजन जो आप खाते हैं। कम से कम थोड़ी मात्रा में शाकाहारी भोजन, खास तौर पर कच्चा खाना आपके सामान्य स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब आप भोजन को पकाते हैं तो बड़ी मात्रा में प्राणशक्ति नष्ट हो जाती है। इसके कारण भी शरीर में एक तरह का आलस्य आ जाता है। अगर आप थोड़ी मात्रा में कच्ची और ताजी चीजें खाएं, तो कई दूसरे फायदों के अलावा, एक लाभ तुरंत होगा कि आपकी नींद काफी कम हो जाएगी।

आपकी सजगता मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी ऊर्जा को कितना संभाल कर रखते हैं। अगर आप ध्यान करना चाहते हैं, तो आपकी सजगता सिर्फ मन के स्तर पर नहीं, बल्कि आपकी ऊर्जा के स्तर पर भी होनी चाहिए। इसमें मदद करने के लिए, आम तौर पर योग के रास्ते पर चलने वाले लोगों को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें सिर्फ चौबीस कौर खाना चाहिए और हर कौर को कम से कम चौबीस बार चबाना चाहिए। इससे आपका भोजन अंदर जाने से पहले ही मुंह में पच जाएगा और सुस्ती नहीं लाएगा।


चौबीस कौर खाना और बाल गीले रखना


अगर आप शाम के भोजन के समय ऐसा करें और फिर रात को सोएं तो आप आसानी से सुबह साढ़े तीन बजे जग सकते हैं और ध्यान कर सकते हैं। योग प्रणाली में इस समय को ब्रह्म मुहूर्तम कहा जाता है।

यह जागने का आदर्श समय है क्योंकि उस समय खुद प्रकृति आपकी साधना में अतिरिक्त सहयोग करती है। अगर आप स्ना्न करें और अपने बाल गीले रखें तो आप आसानी से आठ बजे तक अपनी पूरी साधना के दौरान जागे हुए और सजग रह सकते हैं। अगर आप अपने सुबह के भोजन में सिर्फ चौबीस कौर खाएं, तो निश्चित रूप से रात के भोजन तक आपको नींद नहीं आएगी। डेढ़ से दो घंटे के भीतर, आपको भूख लग जाएगी और यही बेहतरीन तरीका है। सिर्फ पेट के खाली होने पर उसमें भोजन डालना जरूरी नहीं है। बस पानी पिएं और आप पूरे दिन सचेत और ऊर्जावान रहेंगे। आपका शरीर आपके द्वारा अच्छे से खाए हुए भोजन को सिर्फ व्यर्थ करने की बजाय उसका इस्तेमाल करना सीखेगा। यह दुनिया के लिए आर्थिक रूप से और पर्यावरणीय रूप से अच्छा है और आपके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है – अगर आप इस तरह खाएं तो हो सकता है कि कभी बीमार न पड़ें।


“भोजन के मामले में, अलग-अलग तरह के भोजन आजमाइए और फिर देखिए कि उसे खाने के बाद आपके शरीर को कैसा महसूस होता है।”

प्रश्नकर्ता: शरीर को स्वस्थ रखने में भोजन की क्या भूमिका है? कुछ लोग कहते हैं कि शाकाहारी भोजन उत्तम है, लेकिन बाकी लोगों का कहना है कि आहार में थोड़े-बहुत मांस के बिना आप स्वस्थ नहीं रह सकते। यह बहुत भ्रम पैदा करने वाला है..

आप किस तरह का भोजन करते हैं, यह इन बातों पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि आपकी भोजन के बारे में सोच क्या है, आपके मूल्य और मान्यताएं क्या हैं। इसका फैसला इस आधार पर होना चाहिए कि आपके शरीर को क्या चाहिए। भोजन का संबंध शरीर से है। भोजन के बारे में फैसला लेने के लिए अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से मत पूछिए क्योंकि ये लोग हर पांच साल में अपनी राय बदलते रहते हैं। इसके बारे में अपने शरीर से पूछिए कि वह किस तरह के भोजन से खुश होगा।


शरीर की चुस्ती और आलस को परखें


अलग-अलग तरह के भोजन आजमाइए और फिर देखिए कि आपका शरीर कैसा महसूस करता है। अगर आपका शरीर चुस्त, फुर्तीला और ऊर्जावान महसूस करता है तो समझ लीजिए कि उस भोजन को लेकर आपका शरीर संतुष्ट है। लेकिन अगर शरीर आलस महसूस करता है और उसे चलाने के लिए आपको कैफीन या निकोटीन लेने की जरूरत पड़ती है तो इसका मतलब है कि शरीर खुश और संतुष्ट नहीं है।

अगर आप अपने शरीर की सुनें तो वह आपको साफ-साफ बता देगा कि उसे किस तरह का भोजन पसंद है, लेकिन अभी आप अपने दिमाग की सुन रहे हैं। आपका दिमाग हर वक्त आपसे झूठ बोलता रहता है। याद कीजिए, क्या पहले कभी इसने झूठ नहीं बोला? आज यह आपको बताता है कि यह सही है। इसी बात पर कल आपको यह ऐसा महसूस करा देगा कि आप निरे मूर्ख हैं। इसलिए अपने मस्तिषक के हिसाब से न चलिए। आपको बस अपने शरीर की सुननी है।

हर जानवर, हर प्राणी इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि उसे क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। इंसान की प्रजाति को इस धरती पर सबसे ज्यादा बुद्धिमान माना गया है, लेकिन उसे यह भी नहीं पता कि क्या खाना चाहिए। इंसान को कैसा होना चाहिए, इसकी बात तो छोड़ ही दीजिए, उसे तो यह तक नहीं पता होता कि उसे क्या खाना चाहिए। इसलिए अपने शरीर की बात सुनने की कला सीखने के लिए एक खास किस्म की जागरुकता और ध्यान की जरूरत होती है। एक बार यह सीख गये तो आपको पता चल जाता है कि आपको क्या खाना है और क्या नहीं।

आपके शरीर के भीतर जिस प्रकार का भोजन जा रहा है, उस मामले में निश्चित रूप से शाकाहारी भोजन आपके शरीर के लिए मांसाहारी भोजन से बेहतर है। इस बात को हम नैतिक दृष्टिकोण से नहीं कह रहे हैं। हम तो सिर्फ ये देख रहे हैं कि कौन से खाना शरीर के अनुकूल पड़ता है। हम वही भोजन लेने की कोशिश करते हैं, जो हमारे शरीर को आराम पहुंचाए। चाहे आपको अपना कारोबार सही तरीके से चलाना हो, चाहे पढ़ाई करनी हो या कोई और काम करना हो, यह बड़ा महत्वपूर्ण है किस आपका शरीर आराम की स्थिति में हो और जो खाना आप खा रहे हैं, उससे पोषण लेने के लिए शरीर को संघर्ष न करना पड़े। हमें ऐसा ही भोजन करना चाहिए।


कच्चा भोजन प्राण शक्ति से भरपूर होता है


कभी प्रयोग करके देखिए कि जब आप ताजा और कच्चा शाकाहारी भोजन करते हैं, तो आपका शरीर कितना फर्क महसूस करता है। दरअसल, विचार यह है कि जितना हो सके, उतना ताजा और कच्चा भोजन किया जाये।

एक जीवंत कोशिश में वह सब कुछ होता है जो जीवन को पोषण देने के लिए जरूरी है। अगर आप किसी जीवंत कोशिश का सेवन करते हैं तो आपको जो तन्दुरुस्ती महसूस होगी, वह पहले से बिल्कुल अलग किस्म की गी। जब हम भोजन पकाते हैं, तो इससे इसके भीतर का जीवन नष्ट हो जाता है। जब भोजन की जीवंतता नष्ट हो जाती है, तो वह उतनी मात्रा में जीवन ऊर्जा नहीं देता, लेकिन जब आप कच्चा और ताजा भोजन खाते हैं, तो आपके शरीर में एक अलग स्तर की जीवंतता आती है।

अगर कोई भरपूर मात्रा में अंकुरित अनाज, फल, कच्ची सब्जियां खाए, अगर कोई भोजन का 30 से 40 फीसदी अंश कच्चा ही ले तो आप देखेंगे कि उसके भीतर की जीवंतता भी जबर्दस्त तरीके से बनी रहेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जो भोजन आप ले रहे हैं, वह जीवन है। हम जो खा रहे हैं, वे जीवन के अलग-अलग रूप हैं। जीवन के ये अलग-अलग रूप हमारे जीवन को संभालने के लिए अपने जीवन का त्याग कर रहे हैं। हम जो भी जीवंत और कच्चा भोजन कर रहे हैं, अगर उसे पूरी कुतज्ञता के साथ ग्रहण करें तो यह भोजन हमारे भीतर एक अलग तरीके से काम करेगा।

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If You See Your Child Sitting in THIS Position, Stop it Right Away! The Child is in Danger!

If You See Your Child Sitting in THIS Position, Stop it Right Away! The Child is in Danger!

Your sitting position is very important for your health and body posture. A lot of people, especially children sit in a W position, exactly like on the picture. Children spend much time in this position, because it’s very comfortable for them while they are playing. This way of sitting can be the cause of many problems like inner hip rotation and predisposition for development of serious orthopedic issues. Your muscles may be deformed and this position can lead to muscle contractions. Your bones can also be improper developed.

In this position, the torso muscles cannot maintain body balance normally as a result of the effect of gravitation that exceeds the basic body gravity center. If you want to avoid complications just try not to make this sitting position your habit. if your children are sitting this way then you should warn them about the possible consequences. If you see them sitting this way try to motivate them to sit with their legs straightened up.

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क्या तीर्थ स्थल पर साधना करने से लाभ अधिक होता है ?

यह एक बड़ी पुरानी समस्या है कि लोगों को लगता है कि वे जहां हैं, वह जगह उतनी अच्छी नहीं है, कोई दूसरी जगह उन्हें बेहतर लगती है।


मैं यह नहीं कह रहा कि कुछ खास तरह के कामों के लिए कुछ जगहें सहायक नहीं होती हैं – बिल्कुल ऐसी जगहें हैं – लेकिन आध्यात्मिक प्रक्रिया अंदरूनी यात्रा है। चाहे आप न्यू यॉर्क में हों या हिमालय में, दोनों जगह आप तो वैसे ही रहेंगे। जब आप पहाड़ों पर जाते हैं, तो पहले तीन दिन तो आपको लगता है कि आप भी थोड़े असाधारण हो गए हैं, लेकिन तीन दिन बाद ही ये भाव खत्म हो जाते हैं। फिर वही समस्याएं आएंगी। कभी आप अचानक पहाड़ों के पास जाकर बैठते हैं और सोचते हैं, यहां कितनी शांति महसूस हो रही है। लेकिन आप जाकर पहाड़ों पर रहना शुरू कर दीजिए, फिर देखिए। शहरों में रहने के मुकाबले आपको वहां ज्यादा समस्याओं का सामना करना होगा।


यात्रा को आध्यात्मिक प्रक्रिया से मत जोड़िए


हमने शहरों का निर्माण इसलिए किया, ताकि हर चीज व्यवस्थित हो, हर चीज आसानी से उपलब्ध हो। शहरों का निर्माण हमने समस्या पैदा करने के लिए नहीं किया, जीवन को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए हमने शहर बनाए।

अगर हम सभी अपनी ऊर्जा को एक ही जगह लगा दें, तो किसी पहाड़ की गुफा के मुकाबले कहीं ज्यादा आराम और सुविधा हमारे पास होगी। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि ऐसी जगहें नहीं हैं, जो आपको प्रेरित कर सकती हैं। बिल्कुल हैं ऐसी जगहें, लेकिन अगर आप पहले से प्रेरित हैं, तो जो भी जगह आपके लिए सबसे ज्यादा सुविधाजनक हो, आपको वहीं साधना करनी चाहिए क्योंकि इसका मकसद अंदर की ओर मुडऩा है, किसी यात्रा पर जाना नहीं। आप दुनिया की यात्रा करना चाहते हैं, आपको घूमने का शौक है, आप दुनिया देखना चाहते हैं? जरूर देखिए, लेकिन उसे अलग से कीजिए, उसे आध्यात्मिक प्रक्रिया के साथ मत जोड़िए। आप किसी नई जगह आंखें बंदकर के मत बैठिए। यह अपराध है। आप ताजमहल जाएं और वहां आंखें बंद करके ध्यान करने की कोशिश करने लगें तो यह अपराध होगा। बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं। वे ताजमहल के सामने बैठकर ध्यान करते हैं। नहीं, आपको आंखें खोलकर ताजमहल की कलात्मकता और बनावट का आनंद लेना चाहिए। लोग आर्ट म्यूजियम जाकर भी ऐसा ही करते हैं। ऐसा मत कीजिए।


सिर्फ जीवंत रहना बहुत विशाल घटना है


आप अपनी आंखें बंद करते हैं, क्योंकि आप इस दुनिया से कोई मतलब नहीं रखना चाहते। आंखें बंद करने के पीछे यही वजह तो है।


जब मैं आंखें बंद कर लेता हूं, तो इसका मतलब है कि दुनिया से मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य से ज्यादातर लोग जब आंखें बंद कर लेते हैं, तो दुनिया और बड़े स्तर पर आकर उनके साथ जुड़ जाती है। जब आप इस बात में साफ फर्क कर सकें कि भीतर क्या है और बाहर क्या – तो एक आनंद की अनुभूति होती है, जिसे आपको जरुर महसूस करना चाहिए। अगर मैं अपनी आंखें बंद कर लूं तो दुनिया मेरे लिए पूरी तरह खत्म हो जाती है। अगर मैं कुछ दिनों के लिए खुद को दुनियावी बातों से हटा लूं, पांच, छह दिन अगर मैं सिर्फ अपने साथ रहूं तो मेरे दिमाग में एक भी विचार नहीं आएगा। मैं पढ़ता नहीं हूं, टीवी भी नहीं देखता। मैं कुछ नहीं करता, क्योंकि सिर्फ जीवंत रहना उन सारी फ़ालतू चीजों से कहीं बड़ी घटना है जो हम और आप कर सकते हैं।

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बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए ?

योग जीवन से दूर ले जाने वाली चीज नहीं है। यह आपको जीवन के प्रति आकर्षित करता है। तो मुझे बताइए, शुरुआत करने का समय क्या है? साठ साल की उम्र या जितनी जल्दी संभव हो ?


सात साल की उम्र आम तौर एक अच्छी उम्र मानी जाती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे के सामने कई चीजें रखी जाएं जिनके बारे में वे समझदारी से चुनाव कर सके।अगर आप उनके सामने ये विकल्प नहीं रखेंगे, तो उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि दुनिया में बस वही चीजें है, जो उन्हें दिखती हैं। उन्हें लगेगा कि चुनाव सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक और पिज्जा के बीच करना है, और कुछ भी नहीं है यहां।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जीवन की शुरुआत से ही बच्चे के सामने सही चीजें आएं, जो अंदर से काम करने वाली हों, क्योंकि हम अपने आस-पास की दुनिया में जो व्यवस्था करते हैं, उन्हें एक खास सीमा तक ही संभाला जा सकता है। जब तक आपकी खुशहाली बाहरी हालातों के अधीन और उसकी गुलाम होगी, तब तक आप संयोग से ही खुशहाल होंगे क्योंकि बाहरी हालातों पर किसी का भी सौ फीसदी काबू नहीं होता। जिस तरह आबादी बढ़ रही है, हम नहीं जानते कि अगली पीढ़ी किस तरह की बाहरी व्यवस्थाएं कर पाएगी।

बच्चों को किस तरह का योग सीखना चाहिए?

योग के कुछ सरल प्रकार हैं, जिन्हें बच्चे छह-सात साल की उम्र के बाद कर सकते हैं। मगर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कुछ खास अभ्यास उन्हें नहीं सिखाए जाएं। मैं देखता हूं कि कुछ जगहों पर बच्चों को पद्मासन सिखाया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस समय हड्डियां बढ़ रही होती हैं और मुलायम होती हैं, उस समय अस्थिपंजर पर जोर डालने वाली मुद्राओं में बैठने से उनकी हड्डियां मुड़ सकती हैं।

योग सिखाने वाले को पता होना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या उपयुक्त है। योग हर शख्स की जरूरतों और स्थितियों के अनुसार सिखाया जाता है। वयस्कों को सिखाई जाने वाली हर चीज बच्चों को नहीं सिखाई जानी चाहिए। वयस्कों में भी गृहस्थों को हम एक तरह का योग सिखाते हैं और एक संन्यासी बिल्कुल अलग तरह का योग सीखता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप हर किसी को एक जैसी चीजें न सिखाएं।


हम छोटी उम्र से ही योग के लिए आकर्षण कैसे पैदा कर सकते हैं?

बच्चे के लिए शुरुआत करने का सबसे सरल और सुंदर तरीका नाद योग है।जिसमें ध्वनियों पर अधिकार करना सिखाया जाता है।यह उनकी खुशहाली और शरीर व मन के पूरे विकास में मदद करेगा। योग नमस्कार जैसी क्रियाएं भी हैं, जिन्हें छह-सात साल की उम्र में भी सीखा जा सकता है। उप-योग तकनीकें बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए बराबर लाभदायक हैं। जब उन्हें इन क्रियाओं के फायदे पता चलेंगे, जब उन्हें लगेगा कि इससे वे काबिलियत में अपने साथियों से आगे निकल सकते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से योग के अगले चरणों को सिखना चाहेंगे। बड़े होने के साथ, उनका योग भी विकसित होना चाहिए।