बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए ?

योग जीवन से दूर ले जाने वाली चीज नहीं है। यह आपको जीवन के प्रति आकर्षित करता है। तो मुझे बताइए, शुरुआत करने का समय क्या है? साठ साल की उम्र या जितनी जल्दी संभव हो ?


सात साल की उम्र आम तौर एक अच्छी उम्र मानी जाती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे के सामने कई चीजें रखी जाएं जिनके बारे में वे समझदारी से चुनाव कर सके।अगर आप उनके सामने ये विकल्प नहीं रखेंगे, तो उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि दुनिया में बस वही चीजें है, जो उन्हें दिखती हैं। उन्हें लगेगा कि चुनाव सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक और पिज्जा के बीच करना है, और कुछ भी नहीं है यहां।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जीवन की शुरुआत से ही बच्चे के सामने सही चीजें आएं, जो अंदर से काम करने वाली हों, क्योंकि हम अपने आस-पास की दुनिया में जो व्यवस्था करते हैं, उन्हें एक खास सीमा तक ही संभाला जा सकता है। जब तक आपकी खुशहाली बाहरी हालातों के अधीन और उसकी गुलाम होगी, तब तक आप संयोग से ही खुशहाल होंगे क्योंकि बाहरी हालातों पर किसी का भी सौ फीसदी काबू नहीं होता। जिस तरह आबादी बढ़ रही है, हम नहीं जानते कि अगली पीढ़ी किस तरह की बाहरी व्यवस्थाएं कर पाएगी।

बच्चों को किस तरह का योग सीखना चाहिए?

योग के कुछ सरल प्रकार हैं, जिन्हें बच्चे छह-सात साल की उम्र के बाद कर सकते हैं। मगर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कुछ खास अभ्यास उन्हें नहीं सिखाए जाएं। मैं देखता हूं कि कुछ जगहों पर बच्चों को पद्मासन सिखाया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस समय हड्डियां बढ़ रही होती हैं और मुलायम होती हैं, उस समय अस्थिपंजर पर जोर डालने वाली मुद्राओं में बैठने से उनकी हड्डियां मुड़ सकती हैं।

योग सिखाने वाले को पता होना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या उपयुक्त है। योग हर शख्स की जरूरतों और स्थितियों के अनुसार सिखाया जाता है। वयस्कों को सिखाई जाने वाली हर चीज बच्चों को नहीं सिखाई जानी चाहिए। वयस्कों में भी गृहस्थों को हम एक तरह का योग सिखाते हैं और एक संन्यासी बिल्कुल अलग तरह का योग सीखता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप हर किसी को एक जैसी चीजें न सिखाएं।


हम छोटी उम्र से ही योग के लिए आकर्षण कैसे पैदा कर सकते हैं?

बच्चे के लिए शुरुआत करने का सबसे सरल और सुंदर तरीका नाद योग है।जिसमें ध्वनियों पर अधिकार करना सिखाया जाता है।यह उनकी खुशहाली और शरीर व मन के पूरे विकास में मदद करेगा। योग नमस्कार जैसी क्रियाएं भी हैं, जिन्हें छह-सात साल की उम्र में भी सीखा जा सकता है। उप-योग तकनीकें बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए बराबर लाभदायक हैं। जब उन्हें इन क्रियाओं के फायदे पता चलेंगे, जब उन्हें लगेगा कि इससे वे काबिलियत में अपने साथियों से आगे निकल सकते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से योग के अगले चरणों को सिखना चाहेंगे। बड़े होने के साथ, उनका योग भी विकसित होना चाहिए।

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